इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केन्द्र


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पुणे में कम्युनल समुदाय के लोगों द्वारा मारे गए हिन्दू दलित लडके का नाम इंग्लिश डेली न्यूज पेपर Indian Express के मुताबिक  ‪#‎ सावनराठौड़‬  है। इस घटना के बारे में तथ्यात्मक अध्ययन करने और "सावन के वकील रमेश राठौड़ के द्वारा पुणे पुलिस और कोर्ट को साक्ष्य उपलब्ध कराने के लिए हॉस्पिटल में सावन के बयान का वीडियो, जो ' ‪#‎ डाइंगडिक्लरेशन‬ ' के तौर पर रिकॉर्ड किया गया था।" देखने के बाद, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। 'डाइंग डिक्लरेशन' के तौर पर रमेश राठौड़ को बयान इसलिए रिकॉर्ड करना पड़ा। "जब सावन की हालत हॉस्पिटल में खराब हो गई, तो रमेश ने पुलिस से उसका बयान लेने को कहा था। लेकिन, पुलिस ने इनकार कर दिया था।  

 

'डाइंग डिक्लरेशन' के आधार पर रिकॉर्ड वीडियो को देखने के बाद बहुत सारे प्रश्न खड़े होते हैं। जिसके बाद प्रमुखता से देश में हिन्दू समाज द्वारा मुखर रूप में भी और दबी जुबान से ये आवाजें उठती हुई सूनी जा रही है कि - 

 

1. क्या किसी हिन्दू द्वारा अपना धर्म हिन्दू बताना इस देश में गुनाह है या भारतीय संविधान के खिलाफ है ? 

 

2. क्या हिन्दू धर्मावलम्बि देश में रहने के लायक नहीं है ? या 

 

3. क्या हिन्दू धर्मावलम्बी अपना धर्म परिवर्तित कर कम्युनल धर्म को अपना लें? 

 

4. अगर, ऐसा है तो शासन, प्रशासन और न्यायपालिका स्वच्छ और स्वच्छंद होकर बताए कि संविधान के किस आर्टिकल के किस सेक्शन में ऐसा लिखा है ? 

 

5. अन्यथा अति-कम्युनल समुदायों के खिलाफ करवाई करे।

 

ये सभी प्रश्न तब और उचित और मजबूत बन जाते हैं। जब मारे गए हिन्दू दलित लडके के पिता धर्मा राठौड़ मीडिया और पुलिस के समक्ष बोलता है कि - 'हिंदू होने की वजह से मेरे बेटे को कम्युनल धर्म के लोगों द्वारा जिंदा जला दिया गया।क्योंकि मेरे बेटे अपना मजहब हिंदू बताया था।" इस बात की पुष्टि से कोई इंकार नहीं कर सकता यहाँ तक कि पुलिस और न्यायलय भी। क्योंकि सावन के बयान का वीडियो देखने के बाद उसके पिता धर्मा राठौड़ के इस दावे को कुछ समय के लिए कोई झुठला और बर्गला तो सकता है। लेकिन, झूठा और गलत नहीं करार दे सकता है।  

 

धर्मा राठौड़ का यह बयान उसके अंदर के डर-भय को एक तरफ तो प्रदर्शित करता ही है तो दूसरी तरफ उसकी उस लाचारी को भी, जिसे आज प्रत्येक हिन्दू झेल रहा है। आखिर, कानून, प्रशासन और शासन कम्युनल धर्म-संप्रदाय मतावलम्बियों को इतना प्रोटेक्ट क्यों कर रहा है ? यह प्रोटेक्शन कहीं कुर्सी बचाए रखने और भविष्य में पाने की चाह-होड़ में सुर्सी का रूप तो धारण नहीं कर रखा है ?

 

अब उस 'डाइंग डिक्लरेशन' वीडियो पर आते है। इंडियन एक्सप्रेस में छपे रमेश के बयान के मुताबिक, "वीडियो बनाने के वक्त सावन के पिता और बाकी लोग भी मौजूद थे। 'डाइंग डिक्लरेशन' विडियो में सावन अपने वकील से पूछे जाने पर कहता है कि -

 

1. "मैं पंढरपुर में फैमिली के साथ काम करता था। उनसे झगड़े के बाद काम की तलाश में पुणे आ गया। एक दिन तीन लोग आए, नाम पूछा। मैंने बताया सावन राठौड़।"

 

2. 'डाइंग डिक्लरेशन' वीडियो में सावन आगे कहता है, "उन्होंने पूछा कि क्या तुम हिंदू है ? मैंने कहा-हां। इसके बाद उन लोगों ने मुझे जकड कर पकड़ लिया और एक कैन में से कोई लिक्विड मेरे ऊपर डाला और आग लगा दी।"

 

3. 'डाइंग डिक्लरेशन' वीडियो बनाने वाले सावन के वकील रमेश ने जब उससे पूछा कि क्या तुम्हें हिंदू होने की वजह से जलाया गया? तो सावन ने हां का इशारा करते हुए सिर हिलाया। 

 

जिस बैट्री चोरी का आरोप दलित हिन्दू मृत सावन पर लगाया जा रहा है। 'डाइंग डिक्लरेशन' विडियो में सावन या अभी तक पुलिस द्वारा गिरफ्तार उन तीनों लड़कों ने  भी  चोरी  की  किसी बात का जिक्र तक  नहीं किया। वहीं  दूसरी तरफ  ‪ डीसीपी‬   ‪‎ तुषार दोषी‬  का मीडिया में दिया बयान भी विरोधाभाषी दिखता है, - "तीनों आरोपियों की जांच में कम्युनल लिंक्स सामने नहीं आई हैं। हालांकि, उन्होंने सावन पर पेट्रोल छिड़का, उसे पेट्रोल पीने काे मजबूर भी किया और आग लगा दी।" पुलिस के जांच पर भी प्रश्न खड़ा कर देती।

 

 

- तो क्या एक नौजवान को सिर्फ धर्म के आधार पर कुछ लोगों द्वारा जला कर सरेआम मार दिया जाता है ? यह प्रश्न तो अब बार-बार पूछा जायेगा। और, शासन और प्रशासन द्वारा हर बार ऐसे ही कबतक कम्युनल संप्रदाय और धर्मावलम्बियों को प्रोटेक्ट करती रहेगी ?

 

- क्या वाकई में, कम्युनल धर्मावलम्बियों के अंदर की इंसानियत मर गई है ?

 

अब आते है यह जानने के लिए कि आखिर यह पूरा घटनाक्रम की कहानी है क्या ? अखबार  'इंडियन एक्सप्रेस',  Rajasthan Patrika   The HinduFirstpost , MumbaiMirror.comSakaalTV9 Maharashtra   इत्यादि के मुताबिक, मारे गए लड़के का नाम सावन राठौड़ है। उसका परिवार बंजारा कम्युनिटी से है।  

 

- उसके पिता धर्मा राठौड़ के अनुसार घटना के एक हफ्ते पहले (13 जनवरी, 2016 से पहले) बहन से झगड़ा होने के बाद सावन घर से भाग गया था।

 

- 13 जनवरी, 2016 को पुणे के साबापेठ इलाके में तीन लोगों ने सावन पर कार की बैटरी चुराने का आरोप लगाया।

 

- जिसके बाद बेटे को कम्युनल लोग पकड़ के उसको पिटे और उसका नाम पूछे। तो उसने सावन राठौड़ बताया। उन तीनों लोगों ने पूछा क्या तुम हिन्दू हो ? सावन ने बताया कि हाँ, मैं हिंदू हूँ। इसके बाद आरोपियों ने बेटे को जकड कर पकड़ लिया और उस पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी।

 

- सावन को हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। 14 जनवरी को उसकी मौत हो गई।

 

- धर्मा राठौड़ और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब उन्हें बेटे के हॉस्पिटल में होने का पता लगा तो वे वहां पहुंचे।

 

- धर्मा राठौड़ का आरोप है कि मजहब पूछकर कत्ल करने का काम तो इस्लामिक स्टेट के आतंकी ही करते हैं।

 

अगर ऐसे में बंजारा कम्युनिटी ने एसआईटी जांच की 

मांग की है और कहा है कि जांचनहीं करवाया गया, तो 27 जनवरी को आंदोलन करने की धमकी भी दी है। तो बंजारा कम्युनिटी की यह धमकी उचित और जायज भी है। इस जांच के लिए तो देश-विदेश के समूचे हिन्दू धर्मावलम्बियों को एक साथ, एक सुर में सावन राठौड़ और हिन्दू समाज के इंसाफ के लिए आवाज उठानी चाहिए। ऐसा इसलिए, आखिर कबतक कम्युनल धर्म 

के लोग 

धर्म-जाति के आधार पर भेदभाव कर हिन्दुओं को मौत के कब्रिस्तान में दफनाते रहेंगे ? 14 जनवरी को सावन को क्म्युनलों ने अपना शिकार बनाया है, तो कल हम-आपमें या परिवार से कोई भी कम्युनालों का शिकार बन सकता है !  

 

 

 

 

- न्यूटन मिश्र